Virat War- Karna Arjuna Battle Reality

विराट युद्ध (Virat War)- अर्जुन और कर्ण(Karna And Arjuna)

Virat War- Karna Vs Arjuna | महाभारत युद्ध से पहले पांडव अज्ञातवास में थे, और इस अज्ञातवास के काल में पांडव राजा विराट के राज्य में और उसी की राजधानी विराटनगरी में वास कर रहे थे. जहा अर्जुनादी पांडव अपने भेस बदलकर राजप्रसाद मेही निवास कर रहे थे. इसी कार्यकाल के दौरान दुर्योधानादी कौरव, जिनके साथ भीष्म पितामह, कर्ण, और द्रोणाचार्य भी थे वे विराट नगरी पर आक्रमण कर देते हे. त्रिगार्त के राजा सुशर्मा एक दिशा से शुरवाती आक्रमण करते हे, राजा विराट रूप बदले पांडवो के साथ(अर्जुन छोड़कर) सुशर्मा से लड़ने उस दिशा में चला जाता हे.

Virat War Karna Vs Arjuna

विराट युद्ध से पहले, सैरन्ध्री (द्रौपदी) पर गलत नजर रखने के कारन बल्लभ (भीमसेन) कीचक का वध कर देता हे. कीचक काफी बलवान योद्धा था. कीचक से वध के कारन विराट राज्य कमजोर हो गया था, विराट नगरी से सटे त्रिगार्त राज्य को ये इस राज्य की सम्पत्ती हरने का सुनेहरा मौका लगा साथ ही कीचकवध के कारण दुर्योधन को ये संशय हो गया था, की पांडव.. कम से कम भीम तो विराटनगरी में ही हे. कौरवो ने त्रिगार्तनरेश सुशर्मा के साथ मिलकर विराटनगर (Virat War) पर आक्रमण की योजना बनायीं. एकतरफ से, सुशर्मा की सेना विराट नगरीपर आक्रमण कर देती हे, उसे देख राजा विराट अपनी सेना लेकर सुशर्मा से युद्ध करने जाता हे. उसी वक्त कुरु योद्धा दूसरी तरफ से विराट नगरी पर आक्रमण कर देते हे. विराट नगरी का पतन सामने देख ब्रुहनल्ला के भेस में छिपा हुवा अर्जुन आवेशित होकर विराटपुत्र उत्तर के साथ युद्ध के लिए निकल पड़ता हे. उधर विराटनरेश के साथ युधिष्ठिर, भीम, नकुल, सहदेव थे. धर्मराज युधिष्ठिर ने भीम को साफ निर्देष दिए थे कि वो अपनी पहचान जाहीर हो ऐसी कोई कृती न करे. और युद्ध के दौरान आवेशित होकर पेड उघाड़कर ना फेके.

क्या पांडवो का अज्ञातवास ख़त्म हुवा था?

उसी समय उधर अर्जुन के सामने थी कौरव सेना…, अर्जुन ने अपने देवदत्त शंख फूंका, देवदत्त शंख की ध्वनि से पूरी रणभूमि गूंज उठी. दुर्योधन की आँखों में युद्ध से पहले विजय दिखाई दिया. उसने स्री बने अर्जुन को पहचान लिया था..!! यहाँ काफी लोगो को ये लगता हे की, कौरवो ने अज्ञातवास के ख़त्म होने से पहले ही पांडवो को ढूंड लिया तो काफी लोगो को ये लगता हे की शायद दुर्योधन ने गिनती करने में कोई चुक की थी. पर यहाँ आश्चर्य की बात ये हे की, पांडव और कौरव दोनों अपनी जगह ठीक थे..!! जो गलती हुयी थी वो समय की दो अलग मापनपद्धति के कारन हुयी थी. महाभारत के समय के अनुसार दो समय मापने की पद्धतीया अस्तित्व मी थी, जिनका मापन सूर्य और चंद्र के आधार से किया जाता था.

सूर्य कि मापन पद्धती के अनुसार पांडवो का अज्ञातवास खत्म होनेमे ५ महिने १२ दिन बाकी थे. पर उसी वक्त पांडवो का अज्ञातवास चन्द्र की पद्धति से पूर्ण हो चूका था.

किसी दिन फुरसत से हम आपको इन मापनपद्धतियों पर विस्तार से जरुर बताएँगे, अगर आपको इन पद्धातियो के बारे में जानना हो तो हमे कमेंट कर बताये हम जल्दी से जल्दी इस विषय पर लेख लिखेंगे.

अर्जुन वि. कर्ण (Karna Vs Arjuna)

कहानी की प्रस्तावना (Virat War) शुरू करने से पहले हम आपको कुछ तथ्य बतादे ताकि कहानी में किसी भी वीर पर अन्याय न हो, महाभारत के वनपर्व (जो की विराटपर्व से पहले आता हे) में इंद्र कर्ण से उसके कवच कुंडल छल से प्राप्त कर लिये होते हे. और न ही कर्ण के पास उसका विजय धनुष था पर कर्ण के पास इंद्र की दी हुयी वासवी शक्ति थी. इसके विपरीत अर्जुन के पास गांडीव धनुष था, अक्षय तुणीर था जिसके बाण कभी ख़त्म नहीं होते थे. अर्जुन के पास साथ ही एक दिव्य रथ था. विराट युद्ध से पहले हनुमानजी अर्जुन के इस दिव्य रथ पर सवार होकर उसके ध्वज और रथ को संरक्षित कर रहे थे.

Virat Yudh- Arjuna Attacking Karna

विराट युद्ध (Virat War- Karna Arjuna Battle)

(Virat War – First Part/ Karna Vs Arjuna) अर्जुन और कर्ण एकदूसरे के सामने थे. दोनों एकदूसरे पर तिरो की वर्षा करने लगते हे, कोई किसी से कम न था. कर्ण अपनी धनुर्विद्या का परिचय देते हुए एक तीर से अर्जुन की प्रत्यंचा को भेद देता हे. गांडीव कोई साधारण धनुष नहीं था की उसकी प्रत्यंचा साधारण तीर से टूट जाये, तीर धनुष से टकराकर निचे गिर पड़ता हे. अर्जुन के हाथ से गांडीव लडखडाता हे, और नीचे गिर पडता हे. कर्ण साथही अर्जुन के घोडोपर भी तिरो कि वर्षा कर देता हे. पर दिव्य रथ के असाधारण घोडोंपर उसका कोई असर नही होता. जवाब में अर्जुन भी कर्ण के धनुष पर तीर चलाता हे. अर्जुन के तीर कर्ण के साधारण धनुष को आसानी से तोड़ देते हे. धनुष्यविहीन निहत्ये कर्ण पर अर्जुन तिरो की बारिश कर देता हे. जिस कारन जखमी हुवा कर्ण युद्ध से लिये पीछे हटता हे. अर्जुन अपने शुरवाती जोर से भीष्म, द्रोण को भी पीछे धकेल देता हे.

Karna Vs Arjuna

अर्जुन- अश्वथामा युद्ध (Arjuna Ashwathama War)

अश्वथामा और अर्जुन एकदूसरे के सामने थे, काफी कम लोग अश्वथामा के युद्धकौशल के बारे में जानते हे. अश्वथामा कर्ण और अर्जुन जितना ही महान योद्धा था, और लगभग उतने ही दिव्यास्त्र अवहित कर सकता था जितना की ये दो योद्धा. विराट युद्ध में अश्वथामा अर्जुन को आगे बढ़ने से रोक देता हे. अर्जुन और अश्वथामा एकदूसरे पर टूट पड़ते हे, पर कोई भी एकदूसरे को हरा नहीं पाता. पर अश्वथामा के तीर ख़त्म हो जाते हे, इसके विपरीत अक्षय तुणीर के कारन अर्जुन बना रहता हे.

कर्ण और भीष्म की वापसी (Virat War -The Conclusion)

अश्वथामा के तीर ख़त्म होनेतक कर्ण और पितामह भीष्म युद्ध में लौट आते हे, कर्ण और भीष्म के आक्रमण के आगे अर्जुन की एक नहीं चलती. कर्ण के चलाये कुछ बाण अर्जुन को बुरी तरह से घायल भी कर देते हे. अर्जुन के पास अब एक अलग मार्ग चुनता हे (जो देखाजाये तो युद्धशास्र के नियमो के खिलाफ था) अर्जुन सम्मोहम अस्र का प्रयोग करता हे.

सम्मोहन अस्र की तुलना आज के रासायनिक अस्रो से की जा सकती हे. जो एकतरह से भंप छोड़कर इन्सान को मूर्छित करने के काबिल था. पर उसके बहोत बुरे परिणाम पर्यावरण और समाज पर होने के कारन सम्मोहन अस्र का प्रयोग करने की युद्धशास्त्र से मनाई थी.

अर्जुन और कर्ण(Karna Vs Arjuna) मेसे बेहतर कोण इस अनन्तकालीन चर्चा में विराट युद्ध का उपयोग अर्जुन को बेहतर साबित करने में किया जाता हे. जो की बिलकुल सही नहीं हे. अर्जुन और कर्ण दोनों महान योद्धा थे. विराट युद्ध के दौरान कुरु योद्धाओ ने कभी भी अर्जुन पर एकसाथ हमला नहीं किया था जैसा की गन्धर्व युद्ध में कर्ण के साथ हुवा था. साथ ही अकेला अर्जुन कुरु योद्धाओ के सामने युद्ध के लिए गया था और उसने अपने उद्देश को कौरव सेना को रोककर साध्य किया.

अगर आपको हमारे लेख पसंद आ रहे हो तो अपने परिजनों के साथ इस साझा करे, साथ साथ हमे कमेंट मी बताये… आप क्या सोचते हे महाभारत मे कोण (karna Vs Arjuna)सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर था.

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