Unknown Temples Of Maharathi Karna

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महारथी कर्ण के अत्यंत दुर्लभ मंदिर (Unknown Temples Of Maharathi Karna)

महारथी कर्ण के अत्यंत दुर्लभ मंदिर (Unknown Temples Of Maharathi Karna/ Karna Temples) | क्या आपको पता हे कि प्राचीन इराणियन मे देव शब्द का उपयोग कीस अर्थ से करते हे ? या फिर अहुर या असुर शब्द का उपयोग किस कारण करते हे| कोई चीज, व्यक्ती या समुदाय अगर हमारे लिये नकारात्मक हो तो ये जरुरी नही हे कि वो किसी दुसरे के लिये भी नकारात्मकही हो| वो शायद दुसरे के लिये सकारात्मक भी हो सकता हे… और कभी वो व्यक्ती किसी समुदाय का नायक भी हो सकता हे| काफी लोग कहते हे कि, महाभारत मे कर्ण ने अधर्म का साथ दिया | पर शायद जिसे आप और हम जिसे अधर्म मानते हो वही धर्म हो, या धर्म की अलग परिभाषा हो….!! और शायद इसी वजह से भारतभर मे कर्ण के मंदिर पाये जाते हे, और उसे आदिकाल से पूजा जाता हे. आजके आर्टिकल मे हम आपको बतायेंगे महारथी कर्ण के मंदिरो के बारे मे.

१. कर्णेश्वर मंदिर,संगमेश्वर महाराष्ट्र (Karna Temple Sangameshwara, Maharashtra)

महाराष्ट्र के रत्नागिरी के संगमेश्वर मे कर्णेश्वर का प्राचीन शिवमंदिर हे| इस मंदिर के बारे में दो कथाये बताई जाती हे| कुछ लोगो के अनुसार कर्ण द्वारा इस मंदिर का निर्माण किया गया तो दूसरी कथा के अनुसार पांडवो ने अपने बड़े भाई के नामपर इस मंदिर का निर्माण किया था| बादमे चालुक्य राजा कर्ण द्वारा इसका जीर्णोधार किये जाने की कहानी भी बताई जाती हे| यहा भगवान शिव के साथ साथ महारथी कर्ण का भी भव्य मंदिर हे |

२. कर्णेश्वर मंदिर, कर्णावत, मध्य प्रदेश (Karneshwar Temple, Karnawat, Madhya Pradesh)

देवास के पास कर्णावत मे सेंधल नदी के किनारे कर्णेश्वर का प्राचीन मंदिर हे| यहा कि लोक-कथा के अनुसार दानवीर कर्ण यहा के राजा थे और यहाँ बैठकर वे लोगो को दान करते थे| इस कारण इस मंदिर का नाम कर्णेश्वर मंदिर पड़ा| उन्होंने यहाँ देवी की कठिन तपस्या की थी| कर्ण रोज देवी के समक्ष स्वयं की आहूती दे देते और  देवी उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर रोज अमृत के छींटें देकर उन्हें जिंदा करने के साथ ही सवा(१.२५) मन सोना देती थी| जिसे कर्ण उक्त मंदिर में बैठककर ग्रामवासियों को दान कर दिया करते थे|

३. कर्ण और सुयोधन मंदिर, सार्नौल (तामस वेली), उत्तराखंड (Karna and Suyodhana Temple, Sarnaul, Uttarakhand)

यहाँ पर भी दो लोककथाये प्रचलित हे| एक के अनुसार जब दुर्योधन इस जगह पुहचा तो वो इस जगा के सौन्दर्य को देखताही रहा| और तब उसने स्थानिक भगवान् महासू से उस स्थल को उसे देने की प्रार्थना की| भगवान् महासू ने प्रसन्न होकर उसे ये जगह दे दी…तब से यहाँ के लोग मानते हे की दुर्योधन उनकी रक्षा करता हे|

दरसल सारनौल और सौर नाम के दो गांव की भूमि महाभारत काल के महान योद्धा बर्बरिक की धरती मानीजाती है। ऐसी मान्‍यता है कि राजा बर्बरिक कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत युद्ध में कौरव सेना का हिस्सा बनना चाहते थे, किंतु उसकी शक्‍ति से भली भांति परिचित भगवान कृष्ण ने बड़ी ही चालाकी से बर्बरीक का सिर उसके धड़ से अलग करके उन्‍हें युद्ध से दूर कर दिया। मरनेसे पहले उसने श्री कृष्‍ण से युद्ध देखने की इच्छा जाहिर की थी तो उसकी योग्‍यता के चलते ये हुए कृष्‍ण जी ने उसके सिर को एक पेड़ पर टांग दिया और उसने वहीं से महाभारतका पूरा युद्ध देखा।(बादमे इस सर को पर्वत पर रखा गया) कहते हैं कि वो कौरवों की हार देखकर बहुत रोता था और दोनों गांवों के समीप जो नदी है वो बर्बरिक के आंसुओं के कारण ही बनी थी। इसे तमस या टोंस नदी के नाम से जाना जाता है। इसी धारणा के चलते इस नदी का पानी पीने योग्‍य नहींमाना जाता और आज भी लोग इस नदी का पानी नही पिते| उत्तरकाशी के लोकगीतों में बर्बरिक के साथ दुर्योधन और कर्ण की प्रशंसा की जाती है और उन्हें देवताओं के समानपूजा जाता है| हर वर्ष आसपासके २१ गांवो के लोग कर्ण और दुर्योधन के लिये त्योहार मनाते हे| झाकोल और आसपास के प्रदेश मे दुर्योधन को दुर्योधन महाराज कहा जाता हे और झाकोल से कोतेगाव तक दुर्योधन महाराज कि यात्रा निकाली जाती हे| और तब वहा बडा उत्सव मनाया जाता हे| यहा कर्ण और दुर्योधनके ४ मंदिर हे |

१.सार्नौल का कर्णमंदिर
२. पोखू देवता यांनी कर्ण का मंदिर 
३, झाकोल मे दुर्योधन का एक मंदिर
४. नेतवार मे कर्णमंदिर

४. कर्ण मंदिर, देवरा (तामसवेली), उत्तराखंड (Karna Temple, Dewara, Uttarakhand)

ये लकडीयो से बना प्राचीन कर्णमंदिर हे| मंदिर के खम्बो पर पशु, पंछियो, कृमियो के चित्रो की आकृतिया हे| इन्ही आकृतियों से हम महाभारत कि कथा के क्षण भी बनाए गए हे| मकर संक्रांति के दिन एक रग्बी जैसा एक प्राचीन महाभारतकालीन खेल खेला जाता हे|

५. कर्ण मंदिर, हस्तिनापुर,उत्तर प्रदेश (Karna Temple, Hastinapur, Uttar Pradesh)

कहा जाता हे इस मंदिर का निर्माण खुद कर्ण ने किया था| और खुद भगवान शिव की प्रतिस्थापना की थी| यहा भगवान शिव के साथ महारथी कर्ण को भी पूजा जाता हे|

६. कर्ण मंदिर, कर्णवास,उत्तर प्रदेश (Karna Temple, Karnawas, Uttar Pradesh)

महारथी कर्णसे सम्बंधित एक और स्थल हे करनवास| पौराणिक कथाओं और लोककथा के अनुसार कर्ण ने उस समय हर दिन 50 किग्रा सोना दान किया करते थे| जिस शीला परबैठकर कर्ण दान करता था, उसे कर्ण शीला नामसे जाणा जाता हे|

७. कर्ण मंदिर तुलसीवाडी,सुरत, गुजरात (Karna Temple, Tulasiwadi, Gujrat)

युद्ध में कर्ण में मृत्युके बाद कर्ण का दाह संस्कार कोण करेगा इस कारन दुर्योधन और अर्जुन में बहस होती हे| तब भगवान कृष्ण मध्यस्ती कहकर कहते हे की दुर्योधन को ही कर्ण का अंतिम संस्कार करने का हक हे| साथ ही
भगवान कृष्ण कहते हे की कर्ण ने उनसे कहा था की उसका दाहसंस्कार किसी ऐसे पवित्र स्थल पर हो, जहा पाप न हुवा हो| तब कर्ण का यहाँ अंतिम संस्कार हुवा ऐसा माना जाता हे| यहा कि एक और मान्यता हे की, भगवान कृष्णने खुद योगिक अग्नीसे कर्ण का दाहसंस्कार किया था|

८. कर्णमंदिर, कर्णप्रयाग,उत्तराखंड (Karna Temple, Karnaprayag, Uttarakhand)

यहाँ बताई जानेवाली कहानी के अनुसार अर्जुन द्वारा अन्जलिका अस्त्र के चलाने के बाद भी कर्ण जिन्दा था| भगवान कृष्ण ने तब पाया की धर्मदेवता कर्ण की रक्षा कर रहे हे और अर्जुन के हर तीर को कर्णतक पुहचनेसे पहले नष्ट कर रहे हे| जैसा की भगवद गीतामे भगवान कृष्ण ने कहा था… “जहा धर्म होगा विजय वही होगा, और धर्म तो कर्ण के पक्ष में था…!! तब भगवान कृष्णने ब्राह्मण वेश धारण किया और कर्ण से उसका सम्पूर्ण पुण्य दान में मांग लिया| कर्ण ने भी उसे आसानी से दानमें दे दिया| तब जाकर अर्जुन कर्ण को मार पाया था| तब भगवान कृष्णने खुद कर्णप्रयाग में कर्ण का दाहसंस्कार किया| स्वामी विवेकानंदने इसी कर्ण मंदिर मे १८ दिन तक साधना कि थी|

९. भगवान महुनाग(कर्ण) १०८मंदिर, मंडी, हिमाचल प्रदेश (Lord Mahunag, Mandi, Himachal Pradesh)

कर्ण को हिमाचल प्रदेश के लोग भगवान महुनाग के नामसे भी जानते हे| माना जाता हे की जब भक्त किसी संकट में होता हे तो भगवान महुनाग यानि कर्ण उसे संकट से मुक्त करते हे| यहाँ कर्ण के लगभग १०८ मंदिर हे और हर १२ साल बाद यहा कि कर्ण कि मूर्ती को केदारनाथ ले जाया जाता हे|

१०. मानस कामना कर्ण मंदिर,भागलपूर, बिहार (Manas Kamana Karna Temple, Bhagalpur, Bihar)

माना जाता हे मानस-कामना नाथमंदिर मे भगवान शिव और माता चंडी कि स्थापना खुद महावीर कर्ण ने कि थी| मंदिर के पीछे एक शीला हे, और द्वापर युगमे महावीर कर्ण यही बैठकर अपना दानधर्म किया करते थे| यहा कर्णगड नाम का एक प्रसिद्ध ठिकाण हे | कहा जाता हे कि महाभारत काल मे कर्णका राजमहल (palace) यहा हुवा करता था, इस महल से एक tunnel निकलती थी जो गंगा तक जाती थी| ..और हर रोज इसी मार्गसे कर्ण सूर्यदेव को अर्ध्य देणे जाता था|

११. कर्णदिघी, पश्चिम बंगाल (Karnadighi, West Bengal)

पश्चिम बंगाल में कर्णदिघी नामका एक गाँव हे| वहा एक बड़ा सा टैंक हे, माना जाता हे की इस जलाशय का निर्माण कर्ण ने किया हे| यहाँ की यह मान्यता हे की चैत्र महीने के आखिरी दिन और वैशाख महीने के पहले दिन अगर कोई इस जलाशय में स्नान करकर भगवान् से कामना करे तो उसकी इच्छा जरुर पूर्ण होगी| साथ ही यहाँ इन दो दिनों हजारो बांज महिलाये आती हे| यहाँ स्नान करनेके बाद बांज महिलाओ को भी संतानप्राप्ति होती हे ऐसा माना जाता हे|

१२. दुर्योधन और कर्णमंदिर, मालंदा, केरल (Duryodhana and Karna temple, Malanda, Kerala)

केरल के कोलम जिले मे मालांदा नाम का गांव हे| जहा मुख्यरूपसे दुर्योधन का काफी बडा मंदिर हे साथ ही महारथी कर्ण का भी मंदिर हे| पर मंदिर में ‘दुर्योधन’ की कोई मूर्ति नहीं है| वहाँ सिर्फ ग्रेनाइट का एक चबूतरा है माना जाता हे कि अदृश्यरूप मे दुर्योधन उसपर उपस्थित हे, ऐसा माना जाता हे| मंदिर में भगवान गणेश व दूसरे देवताओं की मूर्तियाँ भी लगी हुई हैं| लेकिन दुर्योधन की पूजा के बाद ही इन देवताओं की पूजा की जाती है|

१३. बाली airport पर बनाकर्ण का statue (karna And Ghatotkacha temple, Bali, Indonesia)

हमारे एक दोस्तने कूच दिनो पहले कमेंट करते हुवे हमे कहा था… महाभारत मे कभी भी रात्री मे युद्ध नही हुवा, और हम झूट बताते हे| हमारी पौराणिक कथाओ को जितनी बारिकी से हम नही जाणते उससे ज्यादा इंडोनेशियन जाणते हे और उन्हे गर्वसे जाहीर भी करते हे| इसका प्रमाण हे बाली airport के बाहर बना कर्ण- घटोत्कच के बीच हुये १४वे  रात्री के युद्ध को चित्रित करता statue| जब महारथी कर्णने घटोत्कच को कई बार हराया था और जबमध्यरात्री के बाद घटोत्कच कि शक्तीया बढ गयी तो कर्णने उसका वध कर दिया था|

१४. कर्ण मूर्ती, नेल्लाइप्परमंदिर, तामिळनाडू (Karna statue, Nellaippar, Tamilnadu)

स्वामी नेल्लाइप्पर मंदिर भगवान शिव का प्राचीन मंदिर हे जहा शिव को नेल्लाइप्पर के रूपमे पूजा जाता हे| जहामंदिर के अंदर कर्ण का एक अतिसुंदर स्तंभ बना हे|

१५. कर्ण किला, थानेश्वर,हरयाणा (karna Fort, Thanesae, Haryana)

कुरुक्षेत्र के नजदीक हरयाणा के थानेश्वर मे महारथी कर्ण का किला हे| पुरातत्व विभाग के अनुसार ये किला ३री शताब्दीसे भी ज्यादा पुराना हे| स्थानिक मनाते हे ये किला महाभारत के जमाने का हे|

१६. कर्णमंदिर, कडीका, केरल (Karna temple, Kadica, Kerala)

पाथनामथीत्ता जिले मेकाडी का या अडूर गांव मे बना कर्ण का मंदिर एक प्राचीन मंदिर हे, जो केरल मे काफी प्रसिद्ध हे|

१७ . कर्ण सरोवर, कर्नाल,हरयाणा (Karna Lake, Karnal, Haryana)

चंडीगड से दिल्ली जाते,प्रसिद्ध ग्रांट ट्रंक रोडपर आपको कर्नाल मिल जायेगा, जिसका नाम महारथी कर्ण के नामसे ही पडा हे| कर्नाल को उसका नाम इस शहर के एक प्राचीन जलाशयसे मिला हे, जिसे कर्ण तल से नाम से जाणा जाता हे|

१८. कर्ण-कृष्ण मूर्ती, कर्नाल,हरयाणा (Karna-Krishna Temple, Karnal, Haryana)

कर्नाल के मुख्य चौक मे बना कर्ण-कृष्ण कि मूर्ती tourists को काफी आकर्षित करती हे| इस मूर्ती मे कर्ण के भगवान कृष्ण को दिये पुण्य दान का क्षण दिखाया गया हे| भगवान कृष्ण इसके बाद कर्णसे काफी खुश हुये और उन्होने कर्ण को तब अपना विश्वरूप दिखाया था|

हमे हमारे पूर्वजो से एक विशाल और महान सभ्यता मिली हे| एक ऐसी सभ्यता जहा प्रभू श्रीराम रावण को महाज्ञानी कहते हे… और महाभारत कि महानता ये हे, कि सभी अपनी जगह पर सही थे… चाहे वो दुर्योधनही क्यो न हो, उन्होने समाज के लिये महान कार्य किये थे| कहा जाता हे कि कौरवो ने संपूर्ण भारत मे भगवान शिव के हजारो मंदिर बनवाये थे| मेने कूच दिनो पहले पढा था, कि एक गांव मे दुर्योधन का मंदिर था पर वहा के गांववालो को उससे अब दिक्कतहे और वे उस मंदिर को अन्य देवता के मंदिरमें परावर्तित कर रहे हे| अगर हम हमारी विरासत के साथ ऐसा करेंगे तो क्या फर्क हे हममे और इस्लामी कट्टरता वादियो मे …???

कैसा लगा आपको आजका लेख हमे जरूर कमेंट मे बताये, साथ ही कमेंट मे बताये आपके आसपास के पावन स्थलो के बारे मे जो महाभारत या रामायण से जुडे हे|… या फिर आप उन मंदिरो के बारे मे हमे बता सकते हे, हम पुरा प्रयास करेंगे हमारे माध्यम से इस प्राचीन धरोहर को लोगो तक पुहचाने का|

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