Samsaptaka:- The 3000 Warriors who Sworn to Kill Arjuna

समसप्तक योद्धा- अर्जुन को हरानेवाले वीर

Samsaptaka:- The 3000 Warriors who Sworn to Kill Arjuna | महाभारत कि मुख्य कथा के पीछे अनेको कहानिया छीपी हे, कुछ कथाये भूली हे तो कुछ भुलाई गयी हे. समसप्तक वीरो की महान वीरगाथा इन्ही कथाओमें से एक हे… इन वीरो के शौर्य को आजतक किसीभी टीवी सीरियलने न उठाया हे न ही किसी लेखकने इनपर प्रकाश डाला हे. इनकी महान वीरता की कहानी सिर्फ महाभारत के कुछ पन्नो या श्लोको तक सिमटी हुई हे. आज इन्ही पन्नो से निकलकर हम आपको इन वीरो की कहानी सुनायेंगे. mahabharatastories.in मे मित्रो आप सभीका स्वागत हे , अगर आपको हमारा articles पसंद आया हो तो हमे जरुर पढते रहिये. साथ ही कमेन्ट में बताये आपके अभिप्राय

कोण थे समसप्तक योद्धा?(Who were Samsaptaka)

महाभारत के समय हस्तिनापुर साम्राज्य के उत्तर मे त्रिगार्थ नाम का एक राज्य था. इस त्रिगार्थ के राज्य पर सुशर्मा नामक राजा का शासन था. त्रिगार्थ का ये राजा काफी स्वाभिमानी और महान सेना का धनी था. त्रिगार्थ राज्य का ठीकसे स्थान महाभारत मे नाही मिलता वहा सिर्फ कुरु राज्य के उत्तर मे त्रिगार्थ का स्थान बताया जाता हे पर अनेको साहित्यो के आधार पर त्रिगार्थ का सही स्थान हमने पाया हे. जो कि कुरु साम्राज्य के उत्तर-पश्चिम मे और काम्यक वन के ठीक उपर था. राक्षस और किन्नर साम्राज्य उनके सबसे नजदिकी राज्य थे.

trigartha location

इसी त्रिगार्थ की सेना के ३००० वीर जब कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर उतरे तब उन्होंने पांडवो के सबसे बलशाली और महत्वपूर्ण योद्धा अर्जुन को मारने की शपथ ली और अपने आप को समसप्तक नाम दिया. इस प्रसंग का वर्णन द्रोन पर्व के ९९ वे अध्याय में मिलता हे.

Samsaptaka Sworn Shloka

इस प्रसंग के बारे में वेद व्यास लिखते हे ” वो त्रिगार्थ के ३००० योद्धा थे, जो लढने में माहिर थे उन्होंने राठो की सेना से उसे घेर लिया और उन्होंने शपथ खायी और खुद को समसप्तक कहलवाया”

समसप्तकोद्वारा अर्जुन को हराना(Samsaptaka Defeated Arjuna)

महाभारत के कर्ण पर्व के ३७ वे अध्याय में एक प्रसंग का वर्णन मिलता हे जब समसप्तक विरोने अर्जुन को बंदी बना ही लिया था की भगवान कृष्णने अर्जुन को इन योद्धाओसे बचाया.

Samsaptaka Seized Arjuna

इस प्रसंग के बारे में वेदव्यास लिखते हे…”फुर्ती और तकाद से उन्होंने अर्जुन के रथ पर आक्रमण किया, उसे रथ के पहिये, घोड़े सभीपर उन्होंने हमला किया… रणभूमि पर वे शेर की तरह दहाड रहे थे. उनमेसे कुछ ने भगवन कृष्ण के बलवान हाथ पकडे तो कुछ ने अर्जुन को पकड़ लिया.. इसकारण अर्जुन का रथ एक जगह रुक गया, और अर्जुन हिल भी नहीं पा सकता था…… तभी भगवन कृष्ण एक हाथी जैसा दुसरे हाथी को फेंक देता हे, उसीतरह सभी को निचे फेंक दिया.”

वेदव्यास रचित महाभारत में ऐसे प्रमाण मिलते हे की अर्जुन समसप्तक वीरो से कई बार हारे थे, और युद्धक्षेत्र से इनके डर से भागे थे.

Partha retreat before samsaptaka

it clearly says “Then Follows the wonderfull Drona Parva with many accounts, where partha had to retreat before the samsaptaka in battle” Note down – Partha had to reatreat before samsaptaka, and its not once there were multiple incidents

यहाँ वर्णित श्लोक के अनुसार द्रोणपर्व और उसके बाद ऐसे कई प्रसंग आते हे जब पार्थ को समसप्तक वीरो से हारना पड़ा

कर्ण और त्रिगार्थ कि समसप्तक योद्धाओसहित संपूर्ण सेना का युद्ध (Karna and Trigarth War)

क्या आपको पता हे महान धनुर्धर अर्जुन के लड़ने वाले इन योद्धाओ और त्रिगार्थ की सम्पूर्ण सेना का एकबार महारथी कर्ण के साथ सामना हुवा था…

समसप्तक त्रिगार्थ के राजा सुशर्मा की सेना के ३००० योद्धा थे, पर ये महारथी कर्ण जब दिग्विजय पर निकला था तो कर्ण ने त्रिगार्थ पर भी हमला किया था. त्रिगार्थ की सम्पूर्ण सेना जीनमे समसप्तक वीर भी शामिल थे (त्रिगार्थ के चुनेहुये ३००० योद्धाओ ने अपने आपको कुरुक्षेत्र युद्ध के समय अपनेआप को समसप्तक नाम दिया, उससे पहले वे त्रिगार्थ का अविभाज्य घटक थे)के महारथी कर्ण का कड़ा मुकाबला किया पर कर्ण की वीरता के आगे वो टिक नहीं पाए और कर्ण से पराजित हुए.

कर्ण पर्वके ५वे अध्याय में इसका वर्णन आता हे, यहाँ धृतराष्ट ने कर्ण द्वारा जीते हुए राज्यों का उल्लेख किया था जिसमे सुशर्मा का त्रिगार्थ राज्य भी शामिल था.

Karna trigarth war

हमारे कई मित्र हमसे कहते हे की, चित्रसेन गन्धर्व के साथ हुए युद्ध में कर्ण दुर्योधन को छुड़ा नहीं सका और अर्जुन ने इन्ही गन्धर्वो को हराया था…!! और इसीकारण अर्जुन महाभारत का सर्वश्रेष्ठ योद्धा हे. पर अगर आप उसी न्याय से तय करना चाहोगे तो कर्ण ने न सिर्फ समसप्तक बलकी इससे कई ज्यादा  त्रिगार्थ सम्पूर्ण सेना को पराजित किया था… जिस सेना के छोटे से टुकड़े ने अर्जुन को पराजित किया था. ये ही नाही बल्की गन्धर्वो का युद्ध, एक अचानक हुवा प्रसंग था. जब कर्ण युद्ध के लिए तैयार नहीं था, पर समसप्तको से युद्ध करने के लिए अर्जुन पूरी तरह से तैयार था. अब आप कमेन्ट में बताईये आप किसे महाभारत का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर समजते हे.

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