Reality Draupadi Swayamvara Battle: Karna & Arjuna

कर्ण और अर्जुन स्वयंवर युद्ध- THE REALITY

(Draupadi Swayamvara Battle)! ज्यादातर बार हम धर्म और पुराणो के बारे मे अपनी धारनाये टीवी देखकर बना लेते हे. पर टीवी सिरीयल बनाने वाले शायद ही कभी विशुद्ध रूप से हमे जानकारी देते हे.ऐसीही कूच बात द्रोपदी स्वयंवर के बाद हुये कर्ण अर्जुन युद्ध कि हे. आज के article मे हम जानेंगे इसी स्वयंवर युद्ध कि.

नमस्कार मित्रो स्वागत हे आपका महाभारत स्टोरीज टीवी मे, महाभारत कि कहानियो को आप अपने दोस्तो के साथ जरूर साझा करे… सत्य क्या हे ये हम आपको बताएँगे.

द्रोपदी स्वयंवर और झूट (Draupadi Swayamvara And Serials)

द्रोपदी स्वयंवर(Draupadi Swayamvara) के बारे मे काफी बाते प्रचलित हे, और उनमे से ज्यादातर सत्यसे दूर और कल्पना से नजदीक हे. कूच सिरियल्स मे हमे ये दिखाया गया हे कि धनुर्धर अर्जुन इस युद्धके दौरान कर्ण का धनुष तोड देता हे, तो कुछ के अनुसार कर्ण अर्जुन के तिरो का सामना नहीं कर पाता और केवल अपने दिव्य कवच के कारन बच जाता हे…

महाभारत के अदिपर्व के १८१ वे अध्याय में द्रोपदी स्वयंवर और इस युद्ध का वर्णन मिलता हे.

Dropadi Swayamvar Yudh

द्रोपदी स्वयंवर : ब्राह्मणकुमार और कर्ण युद्ध (Draupadi Swayamvar Brahmana Kumar and Karna Battle)

अर्जुन सहित पांचो पांडव ब्राह्मण वेश में थे. और किसी ने भी उन्हें पहचाना नहीं था. कर्ण सहित सभी क्षत्रिय योद्धा विस्मय में थे की एक ब्राह्मण-कुमार ने द्रोपदी स्वयंवर का प्रन केसे पूर्ण किया और ऐसा कैसे किया.

Arjuna Winning Dropadi Swayamvar

पर जब युद्ध की शुरवात होती हे तो, इस युद्ध के शुरवात में कर्ण अर्जुन की तरफ बढ़ता हे. पर जब ब्राह्मणरूपी अर्जुन कर्ण को तीर मारता हे. तो इन तिरो की गति देखकर कर्ण विस्मय में पड़ जाता हे. और इसीके साथ कर्ण और अर्जुन की भयानक लड़ाई शुरू होती हे. दोनों वीरो द्वारा तिरो कोइतनी गति से चलाया जा रहा था की उन दोनों की तीव्र गतिविधियों के कारन वे दोनों लगभग किसी को दिखाई नहीं दे रहे थे.

“मेरे बाहू का बल तो देखो”,”मेने किस तरह उस तीर को काट-डाला” ऐसे शब्द जो सिर्फ कोई योद्धा समज सकता था.. कहते हुये वे एक दोनों युद्ध कर रहे थे. अर्जुन के हाथो के शौर्य को देख कर्ण और तीव्रतासे युद्ध करने लगता हे. अर्जुन के तिरो को काटते हुए कर्ण दहाड़ने लगा ये देख वहा मौजूद सभी योद्धाओ ने उसकी जयजयकार कि. और युद्ध यही रुक गया था.

अगर वेदव्यास की मूल महाभारत की माने तो न कर्ण का धनुष टुटा था और न ही किसी तीरने ये पराक्रम किया था की वो कर्ण को छू सके. ये एक अनिर्णायक युद्ध था जिसमे याकिनन कर्ण का पलडा भारी था, और जीतते हुए कर्णने युद्ध छोड़ दिया था.

काफी लोग अब पूछेंगे की अगर कर्ण विजयी हो रहा था तो इस युद्ध को क्यों रोका? क्यो उसने अर्जुन का वध नाही किया?

कर्ण ने जिते हुये युद्ध को बीचमे क्यो छोड दिया  (Why Karna Left Battle With Arjuna)

इसका मिथक जानने के लिए स्वयंवर के श्लोको को बारीकी से पढ़ना पड़ेगा… अर्जुन यानि जिसे सब लोग एक ब्राह्मण युवक समझ रहे थे, उसके स्वयंवर जितने के बाद, सभी क्षत्रिय राजा क्रोधित होते हे और वे द्रुपद के खिलाफ खड़े होते हे. वे उद्विग्नता से कहते हे “इन ब्राह्मणों ने अपने अविवेक और मोह के कारन क्षत्रियो के सम्मान को चोट पुहचायी हे, पर फिर हम उनको मार नही सकते. उनको मारना किसी भी कारन से सही नहीं हे. क्योकि ब्रह्महत्या सबसे बड़ा पाप होता हे. हमारा राजपाट धन संपत्ति सब कुछ ब्राह्मणों के लिए होता हे और इसीलिए हम ब्राह्मणों नहीं मारेंगे. पर उनको सबक तो मिलनाही चाहिए, और ये स्वयंवर ऐसे समाप्त नही होना चाहिए…!!”
अदि पर्व के १८०वे अध्याय में इसका वर्णन आता हे.

Karna arjuna dropadi swayamvar

अर्जुन का कर्ण से झूट(Arjuna’s Lie)

उपर के संवाद से ये तो सूर्यके भाती साफ हो जाता हे कि, कर्ण, दुर्योधन, अश्वथामा आदि कुरु वीर और साथही स्वयंवर में मौजूद सभी सभी राजा अर्जुन आदि पांडवो को एक ब्राह्मण ही समझ रहे थे. और उनसे प्राणघातक युद्ध करने से बच रहे थे.

साथही जब युद्ध में अर्जुन और कर्ण एकदूसरे के सामने थे तब कर्ण ब्राह्मण का वेश धारण किये अर्जुन से, शल्य ब्राह्मणवेषाधारी भीम से लड़ रहे थे तो वे काफी आराम और शिथिलता से लड़ रहे थे. 

Shalya Bhima Fight Dropadi

कर्ण इस दुविधा में था कि उससे लडणेवाला युवक ब्राह्मण हे या नही और उसे बार्बार ये लग रहा था की ब्राह्मणवेश धारण किया हुवा कुमार कोई ब्राह्मण न होकर क्षत्रिय हे. इसीकारण कर्ण से रहा न गया और उसने ब्राह्मणवेशधारी अर्जुन से पूछा था? “Have you assumed the form of brahmana to disguise yourself and now fightingwith me for self preservation, mustering the strength of your arms? Arjuna to Karna- O Karna| I am not the science of weapon personified nor amthe powerfull rama. I am only a Brahmana, chief among warrior and supreme amongthose who have knowledge of weapons”

यांनी कर्ण ने पूछा की, “क्या तुमने ब्राह्मण वेश का स्वांग रचा हे ? और अब तुम अपनी प्राणों की रक्षा करने हेतु पूर्णशक्ति से युद्ध कर रहे हो…? तो पता हे अर्जुन ने क्या जवाब दिया ….???उसने कहा की, वो सिर्फ एक ब्राह्मण हे जो योद्धाओमें प्रमुख और अस्त्रों का महानतम ज्ञान रखनेवालो मे सर्वोत्तम हे… महान धनुर्धर अर्जुन ने अपनी पहचान एक क्षत्रिय के रूप में नही दी. क्या अर्जुन को  अपनी शक्ति पे संदेह था ?

Dropadi Swayamvar Ajuna Lied Karna

पर दुनिया भी अजीब हे, एक को उसी झूट के लिए लाखो बार कोसा जाता हे तो दुसरे का झूट किसीको याद भी नही..!!

अर्थात कोई भी अर्जुन द्वारा कहे गए इस वाक्य को कभी नहीं बताता. कर्ण द्वारा विद्या अर्जित करने के लिए बोला गया झूट … झूट था ..!! पर क्या अर्जुन द्वारा अपनी पत्नी प्राप्त करने के लिए … जान बचाने के लिए रचा स्वांग…स्वांग नाही था और बोला झूट … झूट नहीं था.?

इसी प्रसंग के बारे में दुश्शासन ने एक बार कहा था की अगर अर्जुन ने ब्राह्मणका स्वांग रचकर सबको धोका न दिया होता तो वो कभी द्रोपदी को नहीं ले जा सकता था. वो ब्राह्मणरूपमें था इसी कारन उसे कोई पहचान नहीं पाया.

dusshasana of dropadi swayamvar

इस युद्ध के बाद, युदिष्ठिर कर्ण से और भी ज्यादा भयभीत होने लगा था और इसयुद्ध के बाद उसने कहा था की कौरवो के पास भीष्म और द्रोणाचार्य जैसे महान योद्धाहे पर उनके पास उन दोनों से भी घातक कर्ण हे… जिसकी कुशलता देख मेरा मन चिंतामें डूब गया हे. उसके हाथो की तेजी देख मुजे रात में नींद नहीं आती.

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