Karna’s Divine Kavacha and Kundala- Everything !

कर्ण के दिव्य कवच और कुंडल

Karna’s Divine Kavacha and Kundala- Everything ! सभी को महावीर कर्ण के बारे मे पता हे, जो कवच कुंडलो के साथ जन्मा था, पर लगभग न के बराबर लोगो को उसके कवचकुंडल के बारे मे पुरी और सही-सही जानकारी हे. आज के mahabharatastories.in के article मे हम बतायेंगे दानवीर कर्ण के दिव्य कवच और कुंडलो के बारे मे.

महाभारत कि रोचक कहानिया पढ़ने के लिए महाभारतस्टोरीज को जरुर पढ़ते रहिये.

कर्ण का कवच और कुंडल (Kavacha and Kunala)

लगभग सभी लोग कर्ण के कवच को ज्यादा महत्व देते हे, और कईबार तो लोग कुंडल को भूल तक जाते हे. पर अगर महाभारत और प्राचीन ग्रंथो को ठीक से पढ़े तो पता चलता हे. कुंडल कवच से कई ज्यादा प्राचीन और महत्वपूर्ण हे और ये कहे तो गलत नहीं होगा की वास्तविकता में कवच की शक्ति कुण्डलो से ही थी यानि सही माइनोमें कुंडलही कवच की शक्ति और अभेद्यता का स्रोतथे.

वेदव्यास लिखित महाभारत में कुण्डलोको उतनाही महत्व हे जितना की कवच का.

कैसे हुवा कवच और कुण्डलो का निर्माण?(Origin Of Kavacha and Kundala)

कवच और कुण्डलो के निर्माण का मिथक सुलझता हे वो महाभारत के आदि पर्वसे. महाभारत के आदिपर्व के १९१ वे अध्याय में एक कथा आती हे

इस कथा के अनुसार राजमाता कुंती भगवानसूर्य को प्राप्त किये हुए अपने दिव्य मंत्रो से बुला लेती हे, मंत्रो से प्रसन्नसूर्यदेव कुंती से मनचाहा वरदान मांगने को कहते हे. तब कुंती कहती हे की, वो किसीसाधारण पुत्र की कामना नहीं रखती हे और नहीं चाहती की उसका होनेवाला पुत्र किसी साधारण शक्तिके साथ जन्म ले. वे सूर्यदेवसे स्पष्टरूप से जाहिर करती हे की वो चाहती हे की.. उनका पुत्र ऐसे दिव्य कवच और कुण्डलो के साथ जन्म ले जो अभेद्य हो, दुनियाकी कोई शक्ति उन्हें भेद न पाए. इसके उत्तर में  सूर्यदेव कहते हे की उनके पास उनकी माता अदिति के दिए कुंडल हे, जो अमृत से बने हे और साथ ही वे एक अभेद्य कवच अपने पुत्र को देंगे जो भी अमृत से बना होगा.

karna kavacha kundala origin

अगर आप को नहीं पता तो अमृत की महिमा की एक कथा जानले, समुद्र-मंथन के बाद जब राहू ने अमृत पिया था, तब खुद भगवान विष्णुने अपने सुदर्शन चक्र से राहू का वध करने की चेष्टा की थी पर इस महान पेय के प्रताप के कारन राहू के जिसभी अंग में अमृत पोहच पाया उस अंग को सुदर्शन चक्र भी नष्ट नहीं कर पाया था.

कहा जाता हे की, अमृत त्रिदेवो की एकत्रित शक्तियोंसे बना हुवा एक ऐसा विशेष तत्व हे जिसे न काटा जा सकता, न तोडा जा सकता हे और न ही नष्ट किया जा सकता हे

कितने शक्तिशाली थे कवच और कुंडल ? (Kavacha and Kundala Power)

काफी बारहमारे अनेक मित्र कहते हे की अर्जुन के पास इतने भयानक अस्त्र और शस्त्र थे की ये मुमकिन नहीं था की कवच कुंडल उनके आगे टिक सके.

कर्ण के कवच कुंडल साधारण नहीं थे, और इन्हें काटना अर्जुनके लिए संभव नहीं था और अर्जुनके पिता इंद्र को इस बारे में भलीभाती पाता था साथ ही इसकी शक्ति का पूरा अंदाजा था. इसीलिए स्वर्ग के राजा इंद्रने एक याचक बनके कर्ण के सामने झोली फैलाई थी.

महाभारत में भगवन कृष्ण स्वयं एकबार कहते हे की अगर कर्ण के पास कवच और कुंडल होते तो में खुद अपने सुदर्शन चक्र और अर्जुन अपने गांडीव के साथ मिलकर भी उसे भेद नहीं सकते थे. इसका प्रमाण महभारत के द्रोन पर्व के १५५ वे अध्याय में मिलता हे.

Lord Krishna of Karna kavacha kundala

गीता प्रेस की महाभारतमें भी इसका वर्नन किया हुवा हे.

Krishna on Kavacha Kundala Geeta Press

आप खुद कल्पना कर सकते हे, सुदर्शन चक्र जो ब्रह्माण्ड के सबसे भयानक शस्त्रों मेंसे एक हे और जिसकी तुलना भगवान महादेव के त्रिशूलसे की जाती हे.. वो खुद भगवान कृष्ण के मुताबिक अमृत द्वारा निर्मित कवच-कुण्डलो को भेद नहीं सकता था.

तो अब आप कमेन्ट में बताये की क्या अर्जुन के साधारण अस्त्र क्या कर्ण के कवच कुण्डलो को भेद सकते थे ?

कुण्डल की विशेषता?(Karna’s Kundala)

कुण्डलो के रहने से कर्ण की उम्र एकतरहसे ठहर जाती थी, कुंडल कर्ण को इतनी उर्जा प्रदान करते की कर्ण हमेशा एक युवाकी तरह जोश में रहता था. कुरुक्षेत्र युद्ध में कर्ण को अनेको बार उसे एक युवा योद्धा कहा गया हे.

भगवन कृष्ण तो कवच कुण्डलो को अभेद्य मानते थे, युधिष्ठिर भी कर्ण की कुशलता और कवच कुंडल की अभेद्यता के कारन रात में मुश्किल से सो पते थे… महाभारत में एक जगह वर्णन मिलता हे की पांडव १३ सालो तक कर्ण के कारन चैन की नींद नही सो पाए थे.

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