Karna and Chitrasen Gandharva War -The Reality

चित्रसेन गंधर्व और कर्ण युद्ध (Karna and Chitrasen Gandharva War)

Karna and Chitrasen Gandharva War (Karna Vs Gandharva)| चित्रसेन गंधर्व और कर्ण के बिच का युद्ध… जो हजारो लाखो कर्ण के चाहनेवालो के लिए एक प्रश्न बना हे?? दुनिया जीतनेवाला कर्ण कैसे किसी गंधर्व से हार सकता हे?? तो क्या अर्जुन कर्ण से श्रेष्ठ धनुर्धर हे क्यों की उसने उन्ही गन्धर्वो को हराया था ??? आज कर्ण से जुड़े इन प्रश्नों को सुलझाने के लिए इस लेख को पुरा पढ़ना न भूले. साथ ही mahabharatastories.in के लेखो को अपने परीजनो के साथ साझा करे.

पूर्वार्ध- चित्रसेन गन्धर्व कौरव विवाद (Chitrasen Gandharva Vs Kaurava)

एक बार दुर्योधन कर्ण और अपने भाईयो के साथ जंगल मे क्रीडा करणे हेतू गया, और जंगल में वनक्रीडा के समय कर्ण और दुर्योधानादी कौरव मदिरा प्राशन कर लेते हे.(हमे कुछ कथाये मिली जहा कहा गया की कर्ण को नशीला पेय दीया गया था) मदिरा का नशा अपनी जोर पर था. इसी समय गन्धर्वो का रजा चित्रसेन अपनी गंधर्व सेना के साथ उसी जंगल में बेडा डाले बेठा था. गंधर्व अपनी क्रीडा में थे और काफी शोर मचा रहे थे. तब कौरव उन्हें समझाने के लिए गए पर गंधर्व अपनी क्रीडा में पड़े अंतर से क्रोधित होगये और उन्होंने कुरु सेना पर आक्रमण कर दिया.

Karna vs Chitrasen Gandharva

गन्धर्व सेना का आक्रमण देख दुर्योधन, शकुनी और दुश्शासन भी उनपर हमला कर देते हे. गंधर्वो के पास मायावी शक्ति होती हे. कौरवो पर चढ़ा मदिरा का नशा और गन्धर्वो की मायावी ताकद के कारन कौरवो को कुछ समझ नहीं आता, उनका दिमाग काम नहीं कर पाता. गंधर्व इस का फायदा उठाकर दुर्योधन को बंदी बना लेते हे.

कर्ण का युद्ध में आगमन (Karna Chitrasen Gandharva War)

कुछ सैनिक कर्ण को ये समाचार देते हे, कर्ण के दिमाग पर भी मदिरा चढ़ चुकी होती हे. पर अपने मित्र को बचाने हेतु कर्ण अपने डेरे से निकल पड़ता हे. कर्णपर नशा इतना चढ़ा हुवा होता हे की कर्ण अपने पूर्ण शस्त्र भी लेना भूल जाता हे. और पास ही पड़ा हुवा साधारण धनुष उठा लेता हे. कर्ण गन्धर्वो के बड़े में जाकर पोहचता हे. मदिरा का नशा और साधारण धनुष होते हुए भी कर्ण हजारो गन्धर्वो को काट डालता हे. जब गन्धर्वो की हार होने लगती हे तब मजबूरन गंधर्व राजा चित्रसेन को युद्ध में आना पड़ता हे. चित्रसेन अपनी माया की रचना करता हे और १ गंधर्व सैनिक १० जगह नजर आने लगता हे. कुरु सेना एक तरह के मायाजाल में पड जाती हे और भाग निकलती हे. इस माया के कारन कर्ण अकेला पड जाता हे.

Karna Vs Arjuna

हजारो गंधर्व और एक अकेला राधेय …!! हजारो गन्धर्वो से घिरा कर्ण अभी भी हार नहीं मानता. पर उसका साधारण धनुष टूट जाता हे, उसके रथ के घोड़े मारे जाते हे. रथ में पड़ी तलवार लेकर कर्ण गन्धर्वो पर टूट पड़ता हे. और वो अपने प्रिय मित्र दुर्योधन को छुड़ा लेता हे. सारथी और घोड़ो के मारे जाने के कारन कर्ण दुर्योधन का भाई विकर्ण के रथपर चढ़ जाता हे.

कर्ण, विकर्ण और दुर्योधन तेजी से युद्धभूमि से निकल पड़ते हे. पर कुछ दूर जाने के बाद कर्ण जब पीछे देखता हे तो उसे दुर्योधन कही बी नजर नहीं आता. कर्ण को ये पता नहीं था, की दुर्योधन कहा हे. अपने मित्र के लिए वो फिर वापस गन्धर्वो की तरफ चल देता हे.

कर्ण की वापसी और पांडवो की मध्यस्ती (Retreat Of Karna and Pandava)

कर्ण अपने साधारण धनुष से न कोई दिव्यास्त्र चला सकता था और न ही उसके साधारण तिरो को साधारण धनुष से वो ताकद मिल रही थी, जो की विजय धनुष से मिलती थी. कर्ण अपने शस्त्रों को लेकर कर्ण फिरसे गंधर्वो की तरफ बढ़ता हे, जब वो वहा पुहचता हे तब वो देखता हे की अर्जुन और बाकि पांडवो ने दुर्योधन को गन्धर्वो से छुड़ा लिया हे.

इस युद्ध (Karna Vs Gandharva) को काफी लोग बड़े ही अन्यायपूर्ण ढंग से और अर्जुन को कर्ण केसे ज्यादा बडा धनुर्धर साबित करणे हेतू बताते हे. इस युद्ध के दौरान कर्ण मदिरा के नशे में था, और साथ ही उसके शस्त्र उसके पास नहीं थे. सीधे शब्दों में कहा जाय तो ये लड़ाई थी ही नहीं. मजे करने गये कुरु योद्धाओ पर ये गन्धर्वो का पूर्ण तयारी से हमला था. अलग शब्दों में कहे तो किसी को नींद से उठाकर उसकी चेतना जागने से पहले मारना था. कर्ण ने कबर दुर्योधन के लिए दिग्विजय किया था. दिग्विजय के दौरान अकेले कर्ण ने इन्ही गन्धर्वो (Karna Vs Gandharva Later War) को पराजित किया था. और ये विजय काफी आसान सा विजय था.

Karna and Gandharva War

और १ योद्धा का हजारो योद्धाओ का एकसाथ लड़ना ऐसे युद्ध की बात करी जाय तो, कुरुक्षेत्र के १७ वे दिन समसप्तक वीरो ने अर्जुन को बंदी बना लिया था. तब भगवान श्रीकृष्ण को अर्जुन को उनसे छुड़ाना पड़ा. हलाकि तब अर्जुन पुरे होश में था और गांडीव धनुष को धारण किये था. इन समसप्तकको भी कर्ण ने अपने विश्वविजय में पराजित किया था. एक और बात चित्रसेन इंद्र का सेवक रह चूका था. और शायद इसी कारन कर्ण को मदिरा के नशे में देख चित्रसेन को वहा भेजना, और युद्ध को भड़काना ये इंद्र का रचा कपट होने की संभावना कही ज्यादा हे.

अर्जुन और कर्ण (Karna Vs Arjuna) दोनों भी महान योद्धा थे. धनुर्विद्या में एक से बढकर एक अस्त्र दोनों के पास थे. आप हमे कमेन्ट कर बताये आप महाभारत का सबसे बेहतरीन धनुर्धर किसे समझाते हे.

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