Karna And Arjuna Wisdom(Gyan)

कर्ण अर्जुन महाज्ञान (Karna And Arjuna Wisdom)

(Karna And Arjuna Wisdom/Gyan) कई दिनो पहले कि बात हे, मेरे एक मित्रने मुजसे कहा … कि माना कर्ण अर्जुनसे अधिक अच्छा और महाभारत का सबसे अच्छा योद्धा था, पर क्या भगवान कृष्णसे गीता का महान ज्ञान प्राप्त करनेवाला अर्जुन कर्णसे ज्यादा ज्ञानी नही था. ?? 
उस मित्र के प्रश्नने हमे विचार करणे के लिये मजबूर किया और  आजका लेख लिखने के लिये उत्तेजित भी किया.

कर्ण के बारे मे क्या सोचते थे भगवान कृष्ण (Krishna’s Thought About Karna’s Wisdom)

उद्योग पर्वके १३८ वे अध्याय मे एक प्रसंग आता हे, जब भगवान कृष्ण कर्णसे मिलते हे. तब भगवान कृष्ण कर्णसे कहते हे कि … कर्ण तुम सभी सनातन वैदिक सिद्धांत जाणते हो,धर्मशास्त्रो के सूक्ष्म से सूक्ष्म विषयो के तुम महान विद्वान हो.

Krishna's Thought About Karna's Wisdom
महाभारत/ उद्योग पर्व / अध्याय १३७

यतो धर्म ततो: जय: (Where Dharma, Victory Resides There)

कर्ण के वेदिक ज्ञान के बारेमे महाभारत मे अनेको प्रमाण मिलते हे. एकबार जब राजमाता कुंती कर्ण से मिलने आती हे तबभी कर्ण वेदों की साधना कर रहा था. कर्ण शस्त्रों के साथसाथ शास्त्रों में भी पारंगतथे और कर्ण का पूरा जीवन इसका पूरा उदहारण हे.

गीता के तीसरे अध्याय में लिखा हे, “हर व्यक्ति को स्वधर्म का पालन करना चाहिए फिर वो उस राहपर चलते हुए गलतिया क्योंन करे. और स्वधर्म हमेशा उस परधर्म से बड़ा होता हे जिसको दुसरे धर्म मानते हो.”

“श्रीमदभगवदगीता”
Where Dharma, Victory Resides There

आसान शब्दों में कहे तो, अपने विवेकसे हमे जो राह सच्ची लग रही हो उसपर चलना बेहतर हे बजाय जिस राह पर कोई अन्य चलरहा हो, और बहुतांश लोग उसे सही राह कहते हो.

यतो धर्म ततो जय… ||
जहा धर्म हे वही विजय हे…

ये गीता का लोकप्रिय श्लोक, जो भगवन कृष्णने गीता में कहा था. ये श्लोक कर्णने भी एकबार भगवान् कृष्णसे भेट में कहा था, और वो भी अर्जुन के गीता सुनने से काफी पहले.

युधिष्ठीर अर्जुन लडाई (Arjuna Yudishthir Fight, and Krishna’s Comment on Arjuna’s Wisdom)

जब अर्जुन कर्ण के चलाये भार्गावास्त्र से डरकर भाग जाता हे, और इस बात को लेकर युदिष्ठिर अर्जुनसे गुस्सा होते हे और अर्जुन को प्रताडीत करते हुये तब युधिष्ठीर ने कहा था… “अर्जुन, तुम्हे धर्मशास्त्रो का थोडासा भी ज्ञान नहीं हे, शास्त्रोंमें जो बारीकीसे लिखा हे वो तुम्हे थोडा भी नहीं पता” तब भगवान कृष्णने भी इसका समर्थन करतेहुए कहा, की जो युधिष्ठीर को जानता हे वो कभीभी ऐसा नहीं करेगा जैसा तुमने किया,अर्जुन तुम्हे जरासा भी ज्ञान नहीं .. शास्त्र क्या होते हे. कर्ण पर्व के ४९वे अध्याय में इसप्रसंग का पूर्ण वर्णन हे.

Arjuna Yudishthir Fight, and Krishna's Comment on Arjuna's Wisdom

भगवान कृष्णने अर्जुन को अनुगीता क्यो सुनाई (Why Krishna Again told Geeta to Arjuna)

अर्जुन ने जरुर भगवान कृष्णसे गीतासुनी थी, पर आपको क्या लगता हे… क्या अर्जुन इस ज्ञान को सही में प्राप्त करपाया…?? कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद अश्वमेध पर्व में, भगवान् कृष्ण ने गीता को दोहराया था … जिसे वेद व्यास ने अनु गीता नाम दिया हे. अश्वमेध पर्व के १६ वे अध्याय के प्रसंग के अनुसार. अर्जुन भगवन कृष्ण द्वारा बताई गीता भूल गए थे … और तब अर्जुनने भगवान् कृष्णसे कहा … आपने जो गुप्त ज्ञान मुझे दिया था वो में भूल चूका हु,और वो ज्ञान अब में फिरसे प्राप्त करना चाहता हु

Why Krishna Again told Geeta to Arjuna

तब भगवन कृष्ण को क्रोध आ गया. उन्होंने कहा मेने जो तुम्हे बताया था वो इतना विशेष था, पर अब मुझे लगता हे मेने गलती की थी … मेरा मन उदास हे… तुम अज्ञानी हो जो मेने तुम्हे जो ज्ञान दिया वो तुमने लिया नहीं … तुम मंद्बुध्धी हो, अब मेरेलिए असंभव हे की वो ज्ञान में तुम्हे फिरसे दे सकू… मेने खुदको योगमे समर्पित कर वो ज्ञान तुम्हे दिया था … अब में वाही ज्ञान बिना योग के संक्षिप्तमें बता देता हु.

Lord Krishna on Arjuna's Wisdom

अब आप कमेन्ट में हमे बताये, की आप किसे महाज्ञानी समझते हो … उसे जिसने खुद वेदों का ज्ञान अर्जित किया.. या फिर उसे जिसे वेदों का ज्ञान समझाया गया, पर फिर भी वो उसे भूल गया जो उस फटे मटके की तरह था जिसमे ज्ञानरुपी पवित्र जल भरा गया था…

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