Bhagadatta – Warrior Who Defeated Arjuna Twice

भागदत्त – कुरुक्षेत्र मे अर्जुन को दो बार हरानेवाला योद्धा

Bhagadatta – Warrior Who Defeated Arjuna Twice! महाभारत के कई नायक हे, कुछ के बारे मे हम जाणते हे पर अनेको महारथी ऐसे हे जिन्हे काल के चक्र ने भुला दिया.. आज न इन्हे कोई लेखक याद करता हे न ही कोई अन्य माध्यम इन्हे और इनके पराक्रम को न्याय देणे का प्रयत्न करता हे. महाभारत स्टोरीज मे आज हम बात करेंगे एक ऐसेही महान योद्धा कि जिसने न सिर्फ अर्जुन को लगभग मार दिया था बल्की भीम, सात्यकी, अभिमन्यू को भी चीत कर दिया था, और जिसे मारणे के लिये अर्जुन को अधर्म का साथ लेना पद था… उस योद्ध का नाम था भागदत्त(Bhagadatta).

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प्रागज्योतिष के राजा भगदत्त कि कहाणी (Bhagadatta- King Of Pragjyotishpur)

राजा भागदत्त(Bhagadatta) प्रागज्योतिष का राजा था जिसके पिता का नाम नरकासुर था. प्रागज्योतिष एक सदूर उत्तर-पूर्व हिमालय के गोदी में बसनेवाला राज्य था. प्रगज्योतीष को अगर हम आज धुंडणे का प्रयास करेंगे तो आसाम के नजदीक इसे पायेंगे. इसी कारण आसाम मे अनेको विख्यात संस्थाओके नाममे प्रागज्योतिषपूर लिखा जाता हे.

प्रागज्योतिष की सेना किरात और म्लेछो की सेना थी और उनका राजा भगदत्त गजयुद्ध यानि ऐसा युद्ध जो हाथीके ऊपर बैठकर युद्ध किया जाता था, में माहिर था… महाभारत कालमे गजयुद्ध में भगदत्तसे(Bhagadatta) बेहतर अन्य कोई योद्धा नहीं था. महाभारत के अनेको श्लोको में इसका वर्णन मिलता हे.

bhagadatta and pragjyotishpur mahabharata

कर्ण और भगदत्त संघर्ष (Karna and Bhagadatta Battle)

इस प्रागज्योतिष के राज्य को कर्ण अपने दिग्विजय के वक्त जित लेता हे. पितामहा भीष्म जब महारथी कर्ण द्वारा पराजित हुयी सेनाओ का वर्णन करते हे तो उनमेप्रागज्योतिष की सेना भी शामिल थी.

karna and bhagadatta tussle

भीष्म पर्व के छ्टे अध्याय में इसका वर्णन मिलता हे… तब भीष्म पितामह कर्णसे कहते हे. ओ कर्ण तुमने पहलेही हिमालयमें डेरा डाले बैठे किरातो को, जो अपनेभयानक युद्ध के लिए प्रसिद्ध हे .. दुर्योधन का मांडलिक बना दिया हे.  हम हमारे एपिसोड BORI criticaledition of mahabharata के अनुसार बनाते हे, जो की सर्वोत्तम और विशुद्ध महाभारत हे.  

भगदत्त कर्ण युद्ध
Geeta Press Mahabharata

अर्जुन और भागदत्त युद्ध- राजसूय यज्ञ (Rajsuya Parva- Arjuna and Bhagadatta Battle)

जैसा की कर्ण ने अपने दिग्विजय के समय भगदत्त को पराजित किया था. ठीक उसी तरह जब अर्जुन राजसूय यज्ञ के लिए राज्य जित रहा था तब अर्जुन और भगदत्त (Bhagadatta) के बिच में भी एक युद्ध हुवा था. ८ दिनों तक लगातार चले इस युद्ध में न अर्जुन जित सका नही भागदत्त!! अथक प्रयत्न करने के बाद भी अर्जुन प्रागज्योतिष को जितने में असफल रहा था. पर अर्जुन के पिता इंद्र और भागदत्त परम मित्र थे, और इसीलिए भागदत्तने युधिष्ठिर को चक्रवर्ती स्वीकार किया और यज्ञ के लिए उसे शुभकामनाये भी दी.

arjuna and bhagadatta battle rajsuy yagya

इस प्रसंग का वर्णन उद्योग पर्व के १६४ वे अध्यायमें मिलता हे. बादमे कर्ण से हारने के कारन भागदत्त को कौरवो की औरसे लड़ना पड़ा. आप जान कर चौक पड़ेंगे कुरुक्षेत्र युद्ध के वक्त भागदत्त की उम्र १५० साल थी, पर फिर भी इस महान योद्धा ने कई भर भीम, सात्यकी और अभिमन्यु को हराया था.

आप जान कर चौक पड़ेंगे कुरुक्षेत्र युद्ध के वक्त भागदत्त की उम्र १५० साल थी, पर फिर भी इस महान योद्धा ने कई भर भीम, सात्यकी और अभिमन्यु को हराया था.

कुरुक्षेत्र युद्ध और भागदत्त (Kurukshetra And Bhagadatta)

द्रोणपर्व के २५ वे अध्याय में वर्णित श्लोक के अनुसार अभिमन्यु, भीम और सात्यकी के साथ अन्य कई योद्धा एकसाथ अकेले भागदत्त को चारो औरसे घेर लेते हे. पर फिर भी ये बुढा योद्धा हार नहीं मानता… वो पहले सात्यकी को मार भगाता हे, फिरउ सका सुप्रतीक नमक हाथी भीम को सुंडमें उठाकर जमीन पर पटकता हे… 

bhagdatta war with abhimanyu bhim

भीम भी वहा से जान बचाकर भाग जाता हे. अभिमन्यु और बचे योद्धा एकसाथ भागदत्त पर हमला बोल देते हे. भागदत्त अकेले सब को रणक्षेत्रसे मार भगाता हे.द्रोन पर्व के २५वे अध्यायमें इसका वर्णन मिलता हे.

Bhagadatta and arjuna war

अर्जुन भागदत्त युद्ध- बालबाल बचे अर्जुन (Bhagadatta Defeated Arjuna Twice)

कुरुक्षेत्र युद्ध के १२वे दिन महारथी अर्जुन और भागदत्त एकदूसरे के सामने थे.भयानक रणसंग्राम होता हे … इस युद्धमें एक वक्त तो ऐसा आया की भागदत्त ने अर्जुनको अपने हाथीसे लगभग कुचल ही दिया था, पर भगवान कृष्ण अर्जुन को बचा लेते हे. अगर भगवान कृष्ण अर्जुन का रथ मोड़कर वहासे निकाल न देते तो अर्जुन की मृत्यु निश्चित थी. द्रोण पर्व के २७ वे अध्याय में इसका उल्लेख आता हे.

फिर अर्जुनने भागदत्त के कई अस्त्रों को काट दिया और भागदत्त को घायल भी करदिया था. तो भागदत्त ने अपने बालो की पिन निकाली और उससे वैष्णव अस्त्र को आवाहित कर दिया. आवाहित वैष्णव अस्त्र का कोई तोड़ अर्जुन के पास न था … और अर्जुन की मृत्यु अब निश्चित थी … जैसे वैष्णवास्त्र अर्जुन से टकराकर उसके प्राण हरण कर लेता, भगवान कृष्ण बिच में खड़े हो गए. भगवान कृष्ण तो विष्णु के अवतार थे, उन्हें देखते ही अस्त्र वैजयंती मालामें परावर्तित हो गया … और इस तरह भगवान कृष्णने २बार अर्जुन को भागदत्त के हाथो मरने से बचाया. द्रोण पर्व के २८ वे अध्याय में इसका वर्णन आता हे.

vaishnavastra and arjuna

अर्जुन के हाथो भागदत्त का वध (Death Of Bhagdatta)

भागदत्त इक काफी बुढा योद्धा था, यहातक की गीता प्रेस की महाभारत के अनुसारउसकी उम्र इतनी ज्यादा थी की … अपनी आंखे खुली रखने के लिए उसे मस्तक पर पट्टीबांधनी पड़ती थी. और अंत में अर्जुन ने अपने एक तीरसे उस पट्टी को तोड़ दिया, औरआँखोंके ऊपर का मांस आंखोपर आनेसे वो कुछ नहीं देखपा रहा था … और इसी मौके काफायदा लेकर अर्जुनने भागदत्त का वध किया.

Death Of Bhagdatta)

कैसा लगा आजका एपिसोड हमे जरुर बताये. और कमेन्ट में बताये आप किसे महाभारत का सर्वश्रेष्ठ योद्धा समझाते.. 

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